Happy dhanteras

धन से ही तो रस हैं सारे धन ही सुख-दुख के सहारे धन ने किये हैं रोशन बाजार बिन धन यहाँ न कोई मनुहार धन ही पहचान,यही अभिमान सिवा इस रस के न कोई गुणगान गज़ब है चाह न दिल … Continue reading

maine aaj ek bachhe ko

पटाखो कि दुकान से दूर हाथों मे, कुछ सिक्के गिनते मैने उसे देखा… एक गरीब बच्चे कि आखों मे, मैने दिवाली को मरते देखा. थी चाह उसे भी नए कपडे पहनने की… पर उन्ही पूराने कपडो को मैने उसे साफ … Continue reading