Ankahi

वह कहता था वह सुनती थी जारी था एक खेल कहने सुनने का खेल में थी दो पर्चियाँ एक में लिखा था ‘कहो’ एक में लिखा था ‘सुनो’ अब यह नियति थी या महज़ संयोग उसके हाथ लगती रही वही … Continue reading

Bhabhi

बेटीयो के बाद जो मैके के आँगन को महकाती— वो भाभी कहलाती —- माँ बाप के बाद जिसपर बेटीयाँ हक जतलाती —- वो भाभी कहलाती —- सहे नंनद की हुकूमत सारी स्नेह की है जो पिटारी दिल में कितना ही … Continue reading

Un rishto ko thame rakhna

ज़िन्दगी मेरे कानों में अभी हौले से कह गई , उन रिश्तों को थामे रखना जिन के बिना गुज़ारा नहीं , दुनियादारी में हम थोड़े कच्चे हैं पर दोस्ती के मामले में सच्चे है… हमारी सच्चाई बस इस बात पर … Continue reading

Antim yatra

किसी शायर ने अपनी अंतिम यात्रा का क्या खूब वर्णन किया है….. था मैं नींद में और मुझे इतना सजाया जा रहा था…. बड़े प्यार से मुझे नहलाया जा रहा था…. ना जाने था वो कौन सा अजब खेल मेरे … Continue reading