Akal badi ya bhains

अक्ल बङी या भैंस (हास्य-व्यंग) महामूर्ख दरबार में, लगा अनोखा केस फसा हुआ है मामला, … अक्ल बङी या भैंस अक्ल बङी या भैंस, दलीलें बहुत सी आयीं महामूर्ख दरबार की अब,देखो सुनवाई मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस सदा ही … Continue reading

Mera sahar ab badal chala hai

कुछ अजीब सा माहौल हो चला है, मेरा शहर अब बदल चला है…. ढूंढता हूँ उन परिंदों को, जो बैठते थे कभी घरों के छज्ज़ो पर शोर शराबे से आशियाना अब उनका उजड़ चला है, मेरा शहर अब बदल चला … Continue reading

Kaha kisi ne

कहा ये किसी ने कि फूलों से दिल लगाऊं मैं; अगर तेरा ख्याल न सोचूं तो मर जाऊं मैं; माँग ना मुझसे तू हिसाब मेरी मोहब्बत का; आ जाऊं इम्तिहान पे तो हद से गुज़र जाऊं मैं।

Joint family

बहुत सुँदर पंक्तियाँ संयुक्त परिवार वो पंगत में बैठ के निवालों का तोड़ना, वो अपनों की संगत में रिश्तों का जोडना, वो दादा की लाठी पकड़ गलियों में घूमना, वो दादी का बलैया लेना और माथे को चूमना, सोते वक्त … Continue reading

Maa pyari maa

मां को समर्पित एक कविता लेती नहीं दवाई अम्मा, जोड़े पाई-पाई अम्मा । दुःख थे पर्वत, राई अम्मा हारी नहीं लड़ाई अम्मा । इस दुनियां में सब मैले हैं किस दुनियां से आई अम्मा । दुनिया के सब रिश्ते ठंडे … Continue reading