Har hosle ko ajmana chahta hu

होंसले को आजमाना चाहता हूँ।
इक नया जोखिम उठाना चाहता हूँ ।

कामयाबी देखना मिलकर रहेगी ,
मुश्किलों को बस हराना चाहता हूँ ।

वह गजल लिखकर रहूंगा जिंदगी की ,
जो लबों पर गुनगुनाना चाहता हूँ ।

अब उदासी को कहीं जाना पडेगा ,
मैं खुशी से घर सजाना चाहता हूँ ।

मैं बढूंगा जोश लेकर हर कदम ही ,
रास्तों को मैं थकाना चाहता हूँ।

साथ मेरा दे न दे कोई भले ही ,
हमसफ़र खुद को बनाना चाहता हूँ ।

मुश्किलों का सामना हंसकर करूंगा ,
मंजिलों का सर झुकाना चाहता हूँ ।