Jamane mai dost

रहता हूं किराये की काया में… रोज़ सांसों को बेच कर किराया चूकाता हूं…. मेरी औकात है बस मिट्टी जितनी… बात मैं महल मिनारों की कर जाता हूं… जल जायेगी ये मेरी काया ऐक दिन… फिर भी इसकी खूबसूरती पर … Continue reading