इंसान जाने कहां खो गये

[Translate] *एक अच्छी कविता प्राप्त हुई है, जो मनन योग्य है।* “जाने क्यूं_ अब शर्म से,_ चेहरे गुलाब नही होते।_ जाने क्यूं_ अब मस्त मौला मिजाज नही होते।_ पहले बता दिया करते थे, दिल की बातें।_ जाने क्यूं_ अब चेहरे_, … Continue reading

इंसान जाने कहां खो गये

[Translate] *एक अच्छी कविता प्राप्त हुई है, जो मनन योग्य है।* “जाने क्यूं_ अब शर्म से,_ चेहरे गुलाब नही होते।_ जाने क्यूं_ अब मस्त मौला मिजाज नही होते।_ पहले बता दिया करते थे, दिल की बातें।_ जाने क्यूं_ अब चेहरे_, … Continue reading

Imtihan

[Translate] 🎋 *इम्तिहान समझकर*, *सारे ग़म सहा करो…..* *शख़्सियत महक उठेगी,* *बस खुश रहा करो….!!*🎋

Mukkadar hai

[Translate] *”इलाईची के दानों सा,* *मुक़द्दर है अपना…!* *महक उतनी ही बिखरती गई …* *जितने पिसते गए”..!!* *कभी अपने लिये* *कभी अपनों के लिये…!!!!*