एक  विवाहित बेटी का पत्र उसकी माँ के नाम “माँ तुम बहुत याद आती हो” अब मेरी सुबह 6 बजे होती है और रात 12 बज जाती है,              तब “माँ तुम बहुत याद आती हो” सबको गरम गरम परोसती … Continue reading

Har hosle ko ajmana chahta hu

होंसले को आजमाना चाहता हूँ। इक नया जोखिम उठाना चाहता हूँ । कामयाबी देखना मिलकर रहेगी , मुश्किलों को बस हराना चाहता हूँ । वह गजल लिखकर रहूंगा जिंदगी की , जो लबों पर गुनगुनाना चाहता हूँ । अब उदासी … Continue reading

Ummed ki dhal liye betha hu

उलझनों और कश्मकश में, उम्मीद की ढाल लिए बैठा हूँ। ए जिंदगी! तेरी हर चाल के लिए, मैं दो चाल लिए बैठा हूँ | लुत्फ़ उठा रहा हूँ मैं भी आँख – मिचोली का। मिलेगी कामयाबी, हौसला कमाल का लिए … Continue reading

Naseeb

जरुर कोई तो लिखता होगा इन कागज और पत्थर का नसीब…, वरना ये मुमकिन नहीं की कोई पत्थर ठोकर खाए और कोई पत्थर भगवान बन जाए…, और कोई कागज़ रद्दी और कोई कागज़ गीता और कुरान बन जाए…!!!

Father

जब मम्मी डाँट रहीं थी तो कोई चुपके से हँसा रहा था, वो थे पापा. . . . जब मैं सो रहा था तब कोई चुपके से सिर पर हाथ फिरा रहा था , वो थे पापा. . . . … Continue reading

Maine har roz jamane ko

मैंने .. हर रोज .. जमाने को .. रंग बदलते देखा है …. उम्र के साथ .. जिंदगी को .. ढंग बदलते देखा है .. !! वो .. जो चलते थे .. तो शेर के चलने का .. होता था … Continue reading