Fursat

फुर्सत निकालकर आओ कभी मेरी महफ़िल में, लौटते वक्त दिल नहीं पाओगे अपने सीने में..

Naam uska

नाम उसका जुबाँ पर, आते आते रुक जाता है…..!! जब कोई मुझसे मेरी, आखरी ख्वाहिश पूछता है…..!!

Shakuni

अर्जुन भीम युधिष्ठिर सारे समा गए इतिहास में !!  पर शकुनी वाले “पासे” अब भी हैं कुछ लोगों के पास में !!

Tere paas jo hai

“तेरे पास जो है उसमें सब्र कर और उसकी कद्र कर दीवाने, यहाँ तो आसमां के पास भी खुद की जमीं नही…”

Baarish

“मैं ख़ास तो नहीं मगर बारिश की उन कतरों की तरह अनमोल हूँ, जो मिट्टी में समां जाएं तो फिर कभी नहीं मिला करते..”