Happy diwali

​” एक दिया ऐसा भी हो, 

जो भीतर तलक प्रकाश करे ,
एक दिया मुर्दा जीवन में फिर आकर क़ुछ.श्वास भरे !
एक दिया सादा हो इतना , 

जैसे सादा-सरल साधु का जीवन,
एक दिया इतना सुन्दर हो , 

जैसे देवों का उपवन !
एक दिया भेद मिटाये , 

क्या तेरा -क्या मेरा है ,
एक दिया जो याद दिलाये , 

हर रात के बाद सवेरा है !
एक दिया उनकी खातिर हो, जिनके घर में दिया नहीं ,
एक दिया उन बेचारों का जिनको घर ही दिया नहीं !
एक दिया सीमा के रक्षक , 

अपने भारत के वीर जवानों का ,
एक दिया मानवता – रक्षक , चंद बचे(मुट्ठी भर) इंसानों का !
एक दिया विश्बास दे उनको ,

जिनकी हिम्मत टूट गयी ,
एक दिया उस राह में भी हो , 

जो कल पीछे छूट गयी !
एक दिया जो अंधकार का , 

जड़ के साथ विनाश करे ,
एक दिया ऐसा भी हो , 

जो भीतर तलक प्रकाश करे ,”- 
प्रकाशोत्तसव “दीपावली ” पर आप सब को

हार्दिक -शुभकामनाएं –

Jindagi

​जिंदगी आसान नहीं होती,   

इसे आसान बनाना पड़ता है…..
..कुछ ‘अंदाज’ से,

 कुछ

 ‘नजर अंदाज ‘से!! 🍁

Thoda sabra kar

​अच्छे दिन बदल गए,

तो बुरे दिन भी बदल जाएँगे …

थोड़ा धीरज रख तू,

सारे हालात संभल जाएँगे …
या तो बरस जाने दे बादल,

या हवा का इन्तजार कर शांति से …

असीमित गम के बादल,

सुख की धूप में टल जाएँगे …
धरती घूमती है हमेशा,

और मौसम बदलते रहते हैं यूँ ही …

तपते, जलाते, गर्म, सर्द,

सब दिन और मौसम बदल जाएँगे …
दरवाजा बंद कर,

और बिना आवाज थोड़ा रो ले …

आंसुओं के साथ,

सब दुःख दर्द पिघल जाएँगे …
पितृपक्ष में मांग माफ़ी पितरों से,

देवों से, दोस्तों और दुशमनों से भी …

सबका भला कर,

तेरे पुण्य कर्म तेरी खुशियों में ढ़ल जाएँगे॥

Thoda sabra kar

​अच्छे दिन बदल गए,

तो बुरे दिन भी बदल जाएँगे …

थोड़ा धीरज रख तू,

सारे हालात संभल जाएँगे …
या तो बरस जाने दे बादल,

या हवा का इन्तजार कर शांति से …

असीमित गम के बादल,

सुख की धूप में टल जाएँगे …
धरती घूमती है हमेशा,

और मौसम बदलते रहते हैं यूँ ही …

तपते, जलाते, गर्म, सर्द,

सब दिन और मौसम बदल जाएँगे …
दरवाजा बंद कर,

और बिना आवाज थोड़ा रो ले …

आंसुओं के साथ,

सब दुःख दर्द पिघल जाएँगे …
पितृपक्ष में मांग माफ़ी पितरों से,

देवों से, दोस्तों और दुशमनों से भी …

सबका भला कर,

तेरे पुण्य कर्म तेरी खुशियों में ढ़ल जाएँगे॥

Meri hasti itni nahi

​***** बहुत सुंदर पंक्तियाँ *****
“रहता हूं किराये की काया में,

रोज़ सांसों को बेच कर किराया चूकाता हूं…!

मेरी औकात है बस मिट्टी जितनी,

बात मैं महल मिनारों की कर जाता हूं…!

जल जायेगी ये मेरी काया ऐक दिन,

फिर भी इसकी खूबसूरती पर इतराता हूं…!

मुझे पता हे मैं खुद के सहारे श्मशान तक भी ना जा सकूंगा, 

इसीलिए मैं दोस्त बनाता हूँ …!!”😊😊

Hey ram mujhe tujh pe pyar aata hai

सबके हिस्से गम
या खुशी का उपहार आता है …
हे राम तेरे किए मैनेजमेंट पर
मुझे प्यार आता है …

कुछ आँखों में आँसू
तो किन्ही होठों पर मुस्कान …
जैसा भी तू करता है फैसला,
दमदार आता है …

सूखी धरती पर
उग आते हैं हरियाले खेत …
बारिश की बूंदों में
जब तेरा अवतार आता है …

बदलती हैं बहारें
तो नहीं रहते पतझड़ भी सदा …
कभी शीतल हवा
तो कभी मेघ धारदार आता है …

जब दुश्मन बन
झुलसाती है गर्मी जून में …
तो तू बैठ कर बादलों पर,
बनके यार आता है॥

✨🙏🏻✨