Kaha kisi ne

कहा ये किसी ने कि फूलों से दिल लगाऊं मैं;
अगर तेरा ख्याल न सोचूं तो मर जाऊं मैं;
माँग ना मुझसे तू हिसाब मेरी मोहब्बत का;
आ जाऊं इम्तिहान पे तो हद से गुज़र जाऊं मैं।

Joint family

बहुत सुँदर पंक्तियाँ
संयुक्त परिवार
वो पंगत में बैठ के
निवालों का तोड़ना,
वो अपनों की संगत में
रिश्तों का जोडना,

वो दादा की लाठी पकड़
गलियों में घूमना,
वो दादी का बलैया लेना
और माथे को चूमना,

सोते वक्त दादी पुराने
किस्से कहानी कहती थीं,
आंख खुलते ही माँ की
आरती सुनाई देती थी,

इंसान खुद से दूर
अब होता जा रहा है, 
वो संयुक्त परिवार का दौर
अब खोता जा रहा है।

माली अपने हाथ से
हर बीज बोता था, 
घर ही अपने आप में
पाठशाला होता था,

संस्कार और संस्कृति
रग रग में बसते थे,
उस दौर में हम
मुस्कुराते नहीं
खुल कर हंसते थे।

मनोरंजन के कई साधन
आज हमारे पास है, 
पर ये निर्जीव है
इनमें नहीं साँस है,

फैशन के इस दौर में
युवा वर्ग बह गया,
राजस्थान से रिश्ता बस
जात जडूले का रह गया।

ऊँट आज की पीढ़ी को
डायनासोर जैसा लगता है,
आँख बंद कर वह
बाजरे को चखता है।

आज गरमी में एसी
और जाड़े में हीटर है,
और रिश्तों को
मापने के लिये
स्वार्थ का मीटर है।
      
वो समृद्ध नहीं थे फिर भी
दस दस को पालते थे,   
खुद ठिठुरते रहते और
कम्बल बच्चों पर डालते थे।

मंदिर में हाथ जोड़ तो
रोज सर झुकाते हैं,
पर माता-पिता के धोक खाने
होली दीवाली जाते हैं।

मैं आज की युवा पीढी को
इक बात बताना चाहूँगा, 
उनके अंत:मन में एक
दीप जलाना चाहूँगा

ईश्वर ने जिसे जोड़ा है
उसे तोड़ना ठीक नहीं,
ये रिश्ते हमारी जागीर हैं
ये कोई भीख नहीं।

अपनों के बीच की दूरी
अब सारी मिटा लो,
रिश्तों की दरार अब भर लो
उन्हें फिर से गले लगा लो।

अपने आप से
सारी उम्र नज़रें चुराओगे,
अपनों के ना हुए तो
किसी के ना हो पाओगे
सब कुछ भले ही मिल जाए
पर अपना अस्तित्व गँवाओगे

बुजुर्गों की छत्र छाया में ही
महफूज रह पाओगे।
होली बेईमानी होगी
दीपावली झूठी होगी,
अगर पिता दुखी होगा
और माँ रूठी होगी।।।

Maa pyari maa

मां को समर्पित एक कविता

लेती नहीं दवाई अम्मा,
जोड़े पाई-पाई अम्मा ।
दुःख थे पर्वत, राई अम्मा
हारी नहीं लड़ाई अम्मा ।
इस दुनियां में सब मैले हैं
किस दुनियां से आई अम्मा ।
दुनिया के सब रिश्ते ठंडे
गरमागर्म रजाई अम्मा ।
जब भी कोई रिश्ता उधड़े
करती है तुरपाई अम्मा ।
बाबू जी तनख़ा लाये बस
लेकिन बरक़त लाई अम्मा।
बाबूजी थे छड़ी बेंत की
माखन और मलाई अम्मा।
बाबूजी के पाँव दबा कर
सब तीरथ हो आई अम्मा।
नाम सभी हैं गुड़ से मीठे
मां जी, मैया, माई, अम्मा।
सभी साड़ियाँ छीज गई थीं
मगर नहीं कह पाई अम्मा।
अम्मा में से थोड़ी – थोड़ी
सबने रोज़ चुराई अम्मा ।
घर में चूल्हे मत बाँटो रे
देती रही दुहाई अम्मा ।
बाबूजी बीमार पड़े जब
साथ-साथ मुरझाई अम्मा ।
रोती है लेकिन छुप-छुप कर
बड़े सब्र की जाई अम्मा ।
लड़ते-लड़ते, सहते-सहते,
रह गई एक तिहाई अम्मा।
बेटी की ससुराल रहे खुश
सब ज़ेवर दे आई अम्मा।
अम्मा से घर, घर लगता है
घर में घुली, समाई अम्मा ।
बेटे की कुर्सी है ऊँची,
पर उसकी ऊँचाई अम्मा ।
दर्द बड़ा हो या छोटा हो
याद हमेशा आई अम्मा।
घर के शगुन सभी अम्मा से,
है घर की शहनाई अम्मा ।
सभी पराये हो जाते हैं,
होती नहीं पराई अम्मा ।

(कवि का नाम अज्ञात है, लेकिन जिसकी भी है यह रचना, उसे बहुत बहुत साधुवाद।)

Ankahi

वह कहता था
वह सुनती थी
जारी था एक खेल
कहने सुनने का

खेल में थी दो पर्चियाँ
एक में लिखा था ‘कहो’
एक में लिखा था ‘सुनो’

अब यह नियति थी
या महज़ संयोग
उसके हाथ लगती रही
वही पर्ची
जिस पर लिखा था ‘सुनो’
वह सुनती रही

उसने सुने आदेश
उसने सुने उपदेश
बन्दिशें उसके लिए थीं
उसके लिए थीं वर्जनाएँ
वह जानती थी
कहना सुनना
नहीं हैं केवल क्रियाएं

राजा ने कहा ज़हर पियो
वह मीरा हो गई
ऋषि ने कहा पत्थर बनो
वह अहिल्या हो गई
प्रभु ने कहा निकल जाओ
वह सीता हो गई
चिता से निकली चीख
किन्हीं कानों ने नहीं सुनी
वह सती हो गई

घुटती रही उसकी फरियाद
अटके रहे शब्द
सिले रहे होंठ
रुन्धा रहा गला

उसके हाथ कभी नहीं लगी
वह पर्ची
जिस पर लिखा था – ‘ कहो ’

Bhabhi

बेटीयो के बाद जो
मैके के आँगन को महकाती—
वो भाभी कहलाती —-
माँ बाप के बाद जिसपर
बेटीयाँ हक जतलाती —-
वो भाभी कहलाती —-
सहे नंनद की हुकूमत सारी
स्नेह की है जो पिटारी
दिल में कितना ही तूफान भरा हो —-
पर लबों से जो मुस्कान लुटाती—-
वो भाभी कहलाती —-
भाईदूज सावन सिंधारा राखी
नंनदों की जमघट जो घर में लगाती —-
वो भाभी कहलाती —-
भाई- बहन के बीच जो
प्रेम सेतू बन जाती —-
वो भाभी कहलाती —-👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣
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सभी “”भाभीयों”” को समर्पित 🌴🌼🌴🌼🌴🌼🌴🌼🌴🌼

Un rishto ko thame rakhna

ज़िन्दगी मेरे कानों में
अभी हौले से कह गई ,
उन रिश्तों को थामे रखना
जिन के बिना गुज़ारा नहीं ,
दुनियादारी में हम थोड़े कच्चे हैं
पर दोस्ती के मामले में सच्चे है…
हमारी सच्चाई बस इस बात पर कायम है,
की हमारे दोस्त हमसे भी अच्छे है…