Dosti se ye jag roshan

घनघोर निराशा के पल में, अपनेपन का अहसास कराना।
जब तन्हाई बाँह पसारे, तब साथ हो तुम अाभास कराना॥

जब घोर अंधेरे पथ भटकायें, हमराही बनकर कर चलना।
उम्मीद का सूरज डूबे जब, तुम घोर निराशा तम हरना॥

जब बेग़ाना जग हो जायें, अपना कोई जब साथ न दे।
तुम बनना मेरा हमसाया, जब अपनें हाथ में हाथ न दे॥

जब ख़िजा बहारों को निगले, रिश्ते व्यवहारों को निगलें।
जब अपनें दुश्मन हो जायें, ज़ब अपनों को अपने निगले॥

जब दूर दूर तक आस न हो, जब ख़ुद पर भी विश्वास न हो।
ऐ दोस्त चले आना उस पल, जब कोई अपना पास न हो॥

एक यही तो नाता बाकी है, जिसमें अब भी रब बसता है।
दुख दर्द हो या गर्दिश हो, हर पल तेरा प्यार बरसता है॥

बिना दोस्ती जग सूना है, बिना दोस्त सब अंधियारा है।
दोस्ती से ये ज़ग रोशन है, दोस्त ही मेरा ज़हाँ सारा है॥

Vivah kya hai

Vivah kya hai????

विवाह ..
वह खुब़सुरत जंगल हे ..

जहॉ ..

“बहादूर शेरो” का शिकार..

‘हिरणियॉ’ करती हे😜😜

आप मुझे नसीब से मिले हो…..
से लेकर…..
नसीब फूटे थे, जो तुम मिले…..
तक का सफर…..😊😊😊😊

शादीशुदा जिंदगी *कश्मीर* जैसी है ।

खूबसूरत तो है परंतु
*आतंक* बहुत है!!!
😝😝😝😆😆😆😅😅😅

आप रहने दीजिए……से लेकर…..
मेहरबानी करके आप तो रहने ही दो….
तक का सफर…..😊😊😊😊😊

तेरे जैसा कोई नहीं……से लेकर
तेरे जैसे बहुत देखे हैं…..
तक का सफर…..😊😊😊😊

कहाँ गई थी जान….से लेकर….
कहाँ मर गई थीं…..
तक का सफर……😊😊😊😊

अजी सुनते हो, से लेकर……
बहरे हो गए हो क्या…..?????
तक का सफर……😊😊😊😊

Dard kagaj pe

*दर्द कागज़ पर,*
*मेरा बिकता रहा,*

*मैं बैचैन था,*
*रातभर लिखता रहा..*

*छू रहे थे सब,*
*बुलंदियाँ आसमान की,*

*मैं सितारों के बीच,*
*चाँद की तरह छिपता रहा..*

*अकड होती तो,*
*कब का टूट गया होता,*

*मैं था नाज़ुक डाली,*
*जो सबके आगे झुकता रहा..*

*बदले यहाँ लोगों ने,*
*रंग अपने-अपने ढंग से,*

*रंग मेरा भी निखरा पर,*
*मैं मेहँदी की तरह पीसता रहा..*

*जिनको जल्दी थी,*
*वो बढ़ चले मंज़िल की ओर,*

*मैं समन्दर से राज,*
*गहराई के सीखता रहा..!!*

*”ज़िन्दगी कभी भी ले सकती है करवट…*
*तू गुमान न कर…*

*बुलंदियाँ छू हज़ार, मगर…*
*उसके लिए कोई ‘गुनाह’ न कर.*

*कुछ बेतुके झगड़े*,
*कुछ इस तरह खत्म कर दिए मैंने*

*जहाँ गलती नही भी थी मेरी*,
*फिर भी हाथ जोड़ दिए मैंने*

Betiya shubhkamnaye hai

बेटियां शुभकामनाएं हैं,
बेटियां पावन दुआएं हैं।
बेटियां जीनत हदीसों की,
बेटियां जातक कथाएं हैं।
बेटियां गुरुग्रंथ की वाणी,
बेटियां वैदिक ऋचाएं हैं।
जिनमें खुद भगवान बसता है,
बेटियां वे वन्दनाएं हैं।
त्याग, तप, गुणधर्म,
साहस कीबेटियां गौरव कथाएं हैं।
मुस्कुरा के पीर पीती हैं,
बेटी हर्षित व्यथाएं हैं।
लू-लपट को दूर करती हैं,
बेटियाँ जल की घटाएं हैं।
दुर्दिनों के दौर में देखा,
बेटियां संवेदनाएं हैं।
गर्म झोंके बने रहे बेटे,
बेटियां ठंडी हवाएं हैं।

Samandar ishq ka

*तूने देखी कहाँ,…..मेरी चाहतों की… दुनियां,…..*

*समंदर इश्क़ का,…..तेरे लिए …..अभी सूखा नहीं है …..*