Sas bahu ki marwadi kavita

सास बहु की मारवाड़ी कविता:

मत कर सासु बेटो बेटों
ओ तो मिनख हमारो है

जद पहनतो बाबा सूट
जद ओ गुड्डू थारो हो

अब ओ पहरे कोट पेंट.  
अब ओ डार्लिंग म्हारो है

जद ओ पीतो बोतल में दूध
जड़ ओ गिगलो थारो हो

अब पीवे गिलास में जूस
अब ओ मिस्टर म्हारो है

जद ओ लिखतो क ख ग
जद ओ नानको थारो हो

अब ओ करे watsapp sms
अब ओ जानू म्हारो है

जद ओ खातो चोकलेट आइस क्रीम
जद ओ टाबर थारो हो

अब ओ खावे पिज़्ज़ा बिस्कुट
अब ओ हब्बी म्हारो है

जद ओ जातो स्कुल कोलेज
जद ओ मुन्नो थारो हो

अब ओ जाए ऑफिस में
अब ऑफिसर म्हारो है

जद ओ मांगतो पोकेट खर्चो
जद ओ लाडलो थारो हो

अब ओ ल्यावे लाखां रूपिया
अब ओ ए टी एम म्हारो है

मत कर सासू डीकरो डीकरो
अब ओ छैलो म्हारो है

Father

जब
मम्मी
डाँट रहीं थी
तो
कोई चुपके से
हँसा रहा था,
वो थे पापा. . .
.
जब
मैं सो रहा था
तब कोई
चुपके से
सिर पर हाथ
फिरा रहा था ,
वो थे पापा. . .
.
जब
मैं सुबह उठा
तो
कोई बहुत
थक कर भी
काम पर
जा रहा था ,
वो थे पापा. . .
.
खुद
कड़ी धूप में
रह कर
कोई
मुझे ए.सी. में
सुला रहा था ,
वो थे पापा. . .
.
सपने
तो मेरे थे
पर उन्हें
पूरा करने का
रास्ता
कोई और
बताऐ
जा रहा था ,
वो थे पापा. . .
.
मैं तो
सिर्फ
अपनी
खुशियों में
हँसता हूँ,
पर
मेरी हँसी
देख कर
कोई
अपने गम
भुलाऐ
जा रहा था ,
वो थे पापा. . .
.
फल
खाने की
ज्यादा
जरूरत तो
उन्हें थी,
पर
कोई मुझे
सेब
खिलाए
जा रहा था ,
वो थे पापा. . .
.
खुश तो
मुझे होना चाहिए
कि
वो मुझे मिले ,
पर
मेरे
जन्म लेने की
खुशी
कोई और
मनाए
जा रहा था ,
वो थे पापा. . .
.
ये दुनिया
पैसों से
चलती है
पर
कोई
सिर्फ मेरे लिए
पैसे
कमाए
जा रहा था ,
वो थे पापा. . .
.
घर में सब
अपना प्यार
दिखाते हैं
पर
कोई
बिना दिखाऐ भी
इतना प्यार
किए
जा रहा था ,
वो थे पापा. . .
.
पेड़ तो
अपना फल
खा नही सकते
इसलिए
हमें देते हैं…
पर
कोई
अपना पेट
खाली रखकर भी
मेरा पेट
भरे जा रहा था ,
वो थे पापा. . .
.
मैं तो
नौकरी के लिए
घर से बाहर
जाने पर
दुखी था
पर
मुझसे भी
अधिक
आंसू
कोई और
बहाए
जा रहा था ,
वो थे पापा. . .
.
मैं
अपने
“बेटा ” शब्द को
सार्थक
बना सका
या नही..
पता नहीं…
पर
कोई
बिना स्वार्थ के
अपने
“पिता” शब्द को
सार्थक
बनाए
जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

Maine har roz jamane ko

मैंने .. हर रोज .. जमाने को .. रंग बदलते देखा है ….
उम्र के साथ .. जिंदगी को .. ढंग बदलते देखा है .. !!

वो .. जो चलते थे .. तो शेर के चलने का .. होता था गुमान..
उनको भी .. पाँव उठाने के लिए .. सहारे को तरसते देखा है !!

जिनकी .. नजरों की .. चमक देख .. सहम जाते थे लोग ..
उन्ही .. नजरों को .. बरसात .. की तरह ~~ रोते देखा है .. !!

जिनके .. हाथों के .. जरा से .. इशारे से .. टूट जाते थे ..पत्थर ..
उन्ही .. हाथों को .. पत्तों की तरह .. थर थर काँपते देखा है .. !!

जिनकी आवाज़ से कभी .. बिजली के कड़कने का .. होता था भरम ..
उनके .. होठों पर भी .. जबरन .. चुप्पी का ताला .. लगा देखा है .. !!

ये जवानी .. ये ताकत .. ये दौलत ~~ सब कुदरत की .. इनायत है ..
इनके .. रहते हुए भी .. इंसान को ~~ बेजान हुआ देखा है … !!

अपने .. आज पर .. इतना ना .. इतराना ~~ मेरे .. यारों ..
वक्त की धारा में .. अच्छे अच्छों को ~~ मजबूर हुआ देखा है .. !!! 

कर सको……तो किसी को खुश करो……दुःख देते ……..तो हजारों को देखा है..:)

Akal badi ya bhains

अक्ल बङी या भैंस (हास्य-व्यंग)

महामूर्ख दरबार में,
लगा अनोखा केस
फसा हुआ है मामला, …
अक्ल बङी या भैंस

अक्ल बङी या भैंस,
दलीलें बहुत सी आयीं
महामूर्ख दरबार की
अब,देखो सुनवाई

मंगल भवन अमंगल हारी-
भैंस सदा ही अकल पे भारी
भैंस मेरी जब चर आये चारा
पाँच सेर हम दूध निकारा

कोई अकल ना यह कर पावे
चारा खा कर दूध बनावे

अक्ल घास जब चरने जाये
हार जाय नर अति दुख पाये

भैंस का चारा
लालू खायो
निज घरवारि
सी.एम. बनवायो

तुमहू भैंस का चारा खाओ
बीवी को सी.एम. बनवाओ

मोटी अकल मन्दमति होई
मोटी भैंस दूध अति होई

अकल इश्क़ कर कर के रोये
भैंस का कोई बाँयफ्रेन्ड ना होये

अकल तो ले मोबाइल घूमे
एस.एम.एस. पा पा के झूमे

भैंस मेरी डायरेक्ट पुकारे
कबहूँ मिस्ड काल ना मारे

भैंस कभी सिगरेट ना पीती
भैंस बिना दारू के जीती

भैंस कभी ना पान चबाये
ना ही इसको ड्रग्स सुहाये

शक्तिशालिनी शाकाहारी
भैंस हमारी कितनी प्यारी

अकलमन्द को कोई ना जाने
भैंस को सारा जग पहचाने

जाकी अकल मे गोबर होये
सो इन्सान पटक सर रोये

मंगल भवन अमंगल हारी
भैंस का गोबर अकल पे भारी

भैंस मरे तो बनते जूते
अकल मरे तो पङते जूते

Mera sahar ab badal chala hai

कुछ अजीब सा माहौल हो चला है,
मेरा शहर अब बदल चला है….

ढूंढता हूँ उन परिंदों को,
जो बैठते थे कभी घरों के छज्ज़ो पर
शोर शराबे से आशियाना
अब उनका उजड़ चला है,
मेरा शहर अब बदल चला है…..

होती थी इमामबाड़े से
कभी तांगे की सवारी,
मंज़िल तो वही है
मुसाफिर अब आई बस में
चढ़ चला है
मेरा शहर अब बदल चला है…

भुट्टे, कबीट, ककड़ी, इमली
खाते थे कभी हम
स्कूल कॉलेजो के प्रांगण में,
अब तो बस मैकडोनाल्ड,
पिज़्जाहट और
कैफ़े कॉफ़ी डे का दौर चला है
मेरा शहर अब बदल चला है….

वो स्टारलिट, बेम्बिनो,
एलोरा के दीवाने थे आप हम,
अब आइनॉक्स, बिग सिनेमा,
और पीवीआर का शोर चला है
मेरा शहर अब बदल चला हैै….

शहर के चौराहे रुक कर  बतियाते
थे दोस्त घंटों तक
अब तो बस शादी, पार्टी या
उठावने पर मिलने का ही दौर चला है
मेरा शहर अब बदल चला है….

वो टेलीफोन का काला चोगा
उठाकर खैर-ख़बर  पूछते थे,
अब तो स्मार्टफोन से फेसबुक, व्हाटसऐप और ट्वीटर का रोग चला है
मेरा शहर अब बदल चला है…..

नेहरू पार्क;मेघदूत उपवन और
शिवाजी वाटिका में
सेव परमल का ज़ायका रंग जमाता था
अब तो सेन्डविच, पिज़्ज़ा, बर्गर और पॉपकॉर्न की और चला है
मेरा शहर अब बदल चला है….

वो साइकिल पर बैठकर
दूर की डबल सवारी,
कभी होती उसकी,
कभी हमारी बारी,
अब तो बस फर्राटेदार
बाइक का फैशन चला है
मेरा शहर अब बदल चला है….

जाते थे कभी ट्यूशन
पढ़ने माड़ साब के वहाँ,
बैठ जाते थे फटी दरी पर भी
पाँव पसार कर ,
अब तो बस ए.सी.कोचिंग क्लासेस
का धंधा चल पड़ा है,
मेरा शहर अब बदल चला है…..

खो-खो, सितोलिया,
क्रिकेट, गुल्लिडंडा, डिब्बा-डाउन
खेलते थे गलियों और
मोहल्लों में कभी,
अब तो न वो गलियाँ रही
न मोहल्ले न वो खेल,
सिर्फ और सिर्फ कम्प्यूटर गेम्स
का दौर चला है,
मेरा शहर अब बदल चला हैं…..

गांधी हॉल में अल-सुबह तक चलते क्लासिकल गाने-बजाने के सिलसिले
अब तो क्लब; पब, और डीजे का
वायरल चल पड़ा है,
मेरा शहर अब बदल चला है….

कॉलेज की लड़कियों से
बात करना तो दूर
नज़रें मिलाना भी मुश्किल था
अब तो बेझिझक हाय ड्यूड,
हाय बेब्स का रिवाज़ चल पड़ा है
मेरा शहर अब बदल चला है….

घर में तीन भाइयों में
होती थी एकाध साइकिल
बाबूजी के पास स्कूटर,
अब तो हर घर में कारों
और बाइक्स का काफ़िला चल पड़ा है
मेरा शहर अब बदल चला है….

खाते थे समोसे,
कचोरी, जलेबी, गराडू,
गरमा-गरम मालपुए सराफे में,
अब वहाँ भी चाउमिन, नुडल्स,
मन्चूरियन का स्वाद चला हैं
मेरा शहर अब बदल चला है….

कोई बात नहीं;
सब बदले लेकिन मेरे शहर की
खुश्बू में रिश्तों की गर्मजोशी
बरकरार रहे

आओ सहेज लें यादों को
वक़्त रेत की तरह सरक रहा है…
मेरा शहर अब बदल चला हैैं….

Kaha kisi ne

कहा ये किसी ने कि फूलों से दिल लगाऊं मैं;
अगर तेरा ख्याल न सोचूं तो मर जाऊं मैं;
माँग ना मुझसे तू हिसाब मेरी मोहब्बत का;
आ जाऊं इम्तिहान पे तो हद से गुज़र जाऊं मैं।