Muskan

Tera sath hai to mujhe kya kmi hai,
teri her muskaan se mili mujhe kushi hai,
muskuraate rahna isi trh humesha,
kyo ki teri is muskaan me meri jaan bsi hai.

Har hosle ko ajmana chahta hu

होंसले को आजमाना चाहता हूँ।
इक नया जोखिम उठाना चाहता हूँ ।

कामयाबी देखना मिलकर रहेगी ,
मुश्किलों को बस हराना चाहता हूँ ।

वह गजल लिखकर रहूंगा जिंदगी की ,
जो लबों पर गुनगुनाना चाहता हूँ ।

अब उदासी को कहीं जाना पडेगा ,
मैं खुशी से घर सजाना चाहता हूँ ।

मैं बढूंगा जोश लेकर हर कदम ही ,
रास्तों को मैं थकाना चाहता हूँ।

साथ मेरा दे न दे कोई भले ही ,
हमसफ़र खुद को बनाना चाहता हूँ ।

मुश्किलों का सामना हंसकर करूंगा ,
मंजिलों का सर झुकाना चाहता हूँ ।

Ummed ki dhal liye betha hu

उलझनों और कश्मकश में,
उम्मीद की ढाल लिए बैठा हूँ।

ए जिंदगी! तेरी हर चाल के लिए,
मैं दो चाल लिए बैठा हूँ |

लुत्फ़ उठा रहा हूँ मैं भी आँख – मिचोली का।
मिलेगी कामयाबी, हौसला कमाल का लिए बैठा हूँ l

चल मान लिया, दो-चार दिन नहीं मेरे मुताबिक़।
गिरेबान में अपने, ये सुनहरा साल लिए बैठा हूँ l

ये गहराइयां, ये लहरें, ये तूफां, तुम्हे मुबारक।

मुझे क्या फ़िक्र, मैं कश्तीया और दोस्त बेमिसाल लिए बैठा हूँ।

Jab beti ghar se vida ho jayegi

ये घर दरो दीवार सब तरसेंगे
जब बर्तन खन खन खनकेंगे
सारे पकवान फ़ीके पड़ जायेंगे
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी.
बात बात पर उसका नाम
मेरी जुबां पे कभी तेरी जुबां पे
सांसें बहन की अटकी रह जायेगी
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी.
वो जो दिन भर लडता था भैय्या
पापा जिसको धमकाते थे
ताकेगा दीवारों को चुपचाप
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी.
फ़ूलों की रंगत तब कैसी होगी
खुश्बू भी फ़िर न सुहायेगी
चिड़ियों की चहक भी रुलायेगी
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी
बागीचे की गिलहरी क्या भूखी होगी
गमलों में डालेगा अब कौन पानी
क्यारी अब सूखी हो जायेगी
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी.
दादा की चाय की प्याली
भरी भी लगेगी अब खाली
दादी गुम सुम हो जायेगी
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी.
तेरी सहेलियों की वो सारी बातें
कमरे से आती हंसने की आवाज़ें
मुंडेर की बुल बुल चुप हो जायेगी
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी.
घर से दफ़्तर अब दूर होगा
मेरा सेहन अब सूना होगा
शायद ज़हन भी अब गीला होगा
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी.
रख कर सिर पर बेटी के हाथ
बस , ये बाप दुआ देता रह जायेगा
माँ बिलखती हुई रह जायेगी
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी

Aaj braj mai holi hai

बरसाने बरसन लगी, नौ मन केसर धार ।
ब्रज मंडल में आ गया, होली का त्‍यौहार ।।

लाल हरी नीली हुई, नखरैली गुलनार ।
रंग-रँगीली कर गया, होली का त्‍यौहार ।।

आंखों में महुआ भरा, सांसों में मकरंद ।
साजन दोहे सा लगे, गोरी लगती छंद ।।

कस के डस के जीत ली, रँग रसिया ने रार ।
होली ही हिम्‍मत हुई, होली ही हथियार ।।

हो ली, हो ली, हो ही ली, होनी थी जो बात ।
हौले से हँसली हँसी, कल फागुन की रात ।।

होली पे घर आ गया, साजणियो भरतार ।
कंचन काया की कली, किलक हुई कचनार ।।

केसरिया बालम लगा, हँस गोरी के अंग ।
गोरी तो केसर हुई, साँवरिया बेरंग ।।

देह गुलाबी कर गया, फागुन का उपहार ।
साँवरिया बेशर्म है, भली करे करतार ।।

बिरहन को याद आ रहा, साजन का भुजपाश।
अगन लगाये देह में, बन में खिला पलाश ।।

साँवरिया रँगरेज ने, की रँगरेजी खूब ।
फागुन की रैना हुई, रँग में डूबम डूब।।

सतरंगी सी देह पर, चूनर है पचरंग ।
तन में बजती बाँसुरी, मन में बजे मृदंग ।।

जवाकुसुम के फूल से, डोरे पड़ गये नैन ।
सुर्खी है बतला रही, मनवा है बेचैन ।।

बरजोरी कर लिख गया, प्रीत रंग से छंद ।
ऊपर से रूठी दिखे, अंदर है आनंद ।।

होली में अबके हुआ, बड़ा अजूबा काम ।
साँवरिया गोरा हुआ, गोरी हो गई श्‍याम ।।

कंचन घट केशर घुली, चंदन डाली गंध ।
आ जाये जो साँवरा, हो जाये आनंद ।।

घर से निकली साँवरी, देख देख चहुँ ओर ।
चुपके रंग लगा गया, इक छैला बरजोर ।।

बरजोरी कान्‍हा करे, राधा भागी जाय ।
बृजमंडल में डोलता, फागुन है गन्नाय ।।

होरी में इत उत लगी, दो अधरन की छाप ।
सखियाँ छेड़ें घेर कर, किसका है ये पाप ।।

कैसो रँग डारो पिया, सगरी हो गई लाल ।
किस नदिया में धोऊँ अब, जाऊँ अब किस ताल ।।

फागुन है सर पर चढ़ा, तिस पर दूजी भाँग ।
उस पे ढोलक भी बजे, धिक धा धा, धिक ताँग ।।

हौले हौले रँग पिया, कोमल कोमल गात ।
काहे की जल्‍दी तुझे, दूर अभी परभात ।।

फगुआ की मस्‍ती चढ़ी, मनुआ हुआ मलंग ।
तीन चीज़ हैं सूझतीं, रं�