महाराणा प्रताप जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं

सूरज झुका,
चाँद झुका,
झुके गगन के तारे,
अखिल विश्व के
शीश झुके,
पर झुके नहीं
प्रताप हमारे!
मातृभूमि रक्षक
वीरों के वीर
महाराणा प्रताप
महाराणा प्रताप जयंती की
हार्दिक शुभकामनाएं
🙏
*जय_महाराणा_प्रताप*🚩
*जय_मेवाड़*

Adhuri si kahani

अधूरी सी कहानी दिल
की और पूरा प्यार तुम,
गीली पलकों की नमी
और बेरहम याद तुम,
अनछुआ दिल का कोना
और रुह मे घुला एहसास
हो सिर्फ तुम।

इंसान जाने कहां खो गये

*एक अच्छी कविता प्राप्त हुई है, जो मनन योग्य है।*

“जाने क्यूं_
अब शर्म से,_
चेहरे गुलाब नही होते।_
जाने क्यूं_
अब मस्त मौला मिजाज नही होते।_

पहले बता दिया करते थे, दिल की बातें।_
जाने क्यूं_
अब चेहरे_,
खुली किताब नही होते।_

सुना है_
बिन कहे_
दिल की बात_
समझ लेते थे।_
गले लगते ही_
दोस्त हालात_
समझ लेते थे।_

तब ना फेस बुक_
ना स्मार्ट मोबाइल था_
ना फेसबुक_
ना ट्विटर अकाउंट था_
एक चिट्टी से ही_
दिलों के जज्बात_
समझ लेते थे।_

सोचता हूं_
हम कहां से कहां आ गये,_
प्रेक्टीकली सोचते सोचते_
भावनाओं को खा गये।_

अब भाई भाई से_
समस्या का समाधान_
कहां पूछता है_
अब बेटा बाप से_
उलझनों का निदान_
कहां पूछता है_
बेटी नही पूछती_
मां से गृहस्थी के सलीके_
अब कौन गुरु के_
चरणों में बैठकर_
ज्ञान की परिभाषा सीखे।_

परियों की बातें_
अब किसे भाती है_
अपनो की याद_
अब किसे रुलाती है_
अब कौन_
गरीब को सखा बताता है_
अब कहां_
कृष्ण सुदामा को गले लगाता है_

जिन्दगी मे_
हम प्रेक्टिकल हो गये है_
मशीन बन गये है सब_
इंसान जाने कहां खो गये है!

*इंसान जाने कहां खो गये* 🙏🏼🙏🏼

इंसान जाने कहां खो गये

*एक अच्छी कविता प्राप्त हुई है, जो मनन योग्य है।*

“जाने क्यूं_
अब शर्म से,_
चेहरे गुलाब नही होते।_
जाने क्यूं_
अब मस्त मौला मिजाज नही होते।_

पहले बता दिया करते थे, दिल की बातें।_
जाने क्यूं_
अब चेहरे_,
खुली किताब नही होते।_

सुना है_
बिन कहे_
दिल की बात_
समझ लेते थे।_
गले लगते ही_
दोस्त हालात_
समझ लेते थे।_

तब ना फेस बुक_
ना स्मार्ट मोबाइल था_
ना फेसबुक_
ना ट्विटर अकाउंट था_
एक चिट्टी से ही_
दिलों के जज्बात_
समझ लेते थे।_

सोचता हूं_
हम कहां से कहां आ गये,_
प्रेक्टीकली सोचते सोचते_
भावनाओं को खा गये।_

अब भाई भाई से_
समस्या का समाधान_
कहां पूछता है_
अब बेटा बाप से_
उलझनों का निदान_
कहां पूछता है_
बेटी नही पूछती_
मां से गृहस्थी के सलीके_
अब कौन गुरु के_
चरणों में बैठकर_
ज्ञान की परिभाषा सीखे।_

परियों की बातें_
अब किसे भाती है_
अपनो की याद_
अब किसे रुलाती है_
अब कौन_
गरीब को सखा बताता है_
अब कहां_
कृष्ण सुदामा को गले लगाता है_

जिन्दगी मे_
हम प्रेक्टिकल हो गये है_
मशीन बन गये है सब_
इंसान जाने कहां खो गये है!

*इंसान जाने कहां खो गये* 🙏🏼🙏🏼

इंसान जाने कहां खो गये

*एक अच्छी कविता प्राप्त हुई है, जो मनन योग्य है।*

“जाने क्यूं_
अब शर्म से,_
चेहरे गुलाब नही होते।_
जाने क्यूं_
अब मस्त मौला मिजाज नही होते।_

पहले बता दिया करते थे, दिल की बातें।_
जाने क्यूं_
अब चेहरे_,
खुली किताब नही होते।_

सुना है_
बिन कहे_
दिल की बात_
समझ लेते थे।_
गले लगते ही_
दोस्त हालात_
समझ लेते थे।_

तब ना फेस बुक_
ना स्मार्ट मोबाइल था_
ना फेसबुक_
ना ट्विटर अकाउंट था_
एक चिट्टी से ही_
दिलों के जज्बात_
समझ लेते थे।_

सोचता हूं_
हम कहां से कहां आ गये,_
प्रेक्टीकली सोचते सोचते_
भावनाओं को खा गये।_

अब भाई भाई से_
समस्या का समाधान_
कहां पूछता है_
अब बेटा बाप से_
उलझनों का निदान_
कहां पूछता है_
बेटी नही पूछती_
मां से गृहस्थी के सलीके_
अब कौन गुरु के_
चरणों में बैठकर_
ज्ञान की परिभाषा सीखे।_

परियों की बातें_
अब किसे भाती है_
अपनो की याद_
अब किसे रुलाती है_
अब कौन_
गरीब को सखा बताता है_
अब कहां_
कृष्ण सुदामा को गले लगाता है_

जिन्दगी मे_
हम प्रेक्टिकल हो गये है_
मशीन बन गये है सब_
इंसान जाने कहां खो गये है!

*इंसान जाने कहां खो गये* 🙏🏼🙏🏼

इंसान जाने कहां खो गये

*एक अच्छी कविता प्राप्त हुई है, जो मनन योग्य है।*

“जाने क्यूं_
अब शर्म से,_
चेहरे गुलाब नही होते।_
जाने क्यूं_
अब मस्त मौला मिजाज नही होते।_

पहले बता दिया करते थे, दिल की बातें।_
जाने क्यूं_
अब चेहरे_,
खुली किताब नही होते।_

सुना है_
बिन कहे_
दिल की बात_
समझ लेते थे।_
गले लगते ही_
दोस्त हालात_
समझ लेते थे।_

तब ना फेस बुक_
ना स्मार्ट मोबाइल था_
ना फेसबुक_
ना ट्विटर अकाउंट था_
एक चिट्टी से ही_
दिलों के जज्बात_
समझ लेते थे।_

सोचता हूं_
हम कहां से कहां आ गये,_
प्रेक्टीकली सोचते सोचते_
भावनाओं को खा गये।_

अब भाई भाई से_
समस्या का समाधान_
कहां पूछता है_
अब बेटा बाप से_
उलझनों का निदान_
कहां पूछता है_
बेटी नही पूछती_
मां से गृहस्थी के सलीके_
अब कौन गुरु के_
चरणों में बैठकर_
ज्ञान की परिभाषा सीखे।_

परियों की बातें_
अब किसे भाती है_
अपनो की याद_
अब किसे रुलाती है_
अब कौन_
गरीब को सखा बताता है_
अब कहां_
कृष्ण सुदामा को गले लगाता है_

जिन्दगी मे_
हम प्रेक्टिकल हो गये है_
मशीन बन गये है सब_
इंसान जाने कहां खो गये है!

*इंसान जाने कहां खो गये* 🙏🏼🙏🏼